500 से अधिक लोगों पलायन को मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाने की घटना मनरेगा समेत सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और बीपीएल कार्ड बनाने की ज़मीनी हकीकत को उजागर कर गयी. इस खुलासे के बाद सरकार ने जो अह्तियती कदम उठाये उनका स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन सरकारी तंत्र के कामकाज के तरीके को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि इसे किस हद तक अमली जामा पहनाया जा सकेगा.
सरकार ने निश्चय किया है कि मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में जानेवाले ग्रामीणों का पंचायत स्तर पर पंजीकरण किया जायेगा और उन्हें ले जानेवालों को लाइसेंस जारी किया जायेगा. इससे ग्रामीणों के गम होने या उन्हें बेच दिए जानेवाली घटनाओं में विराम लगेगा. झारखंड की बेटियों को महानगरों में ले जाकर देह मंदी में पहुँचाने वालों की नकेल भी कसी जा सकेगी. इसके जरिये मानव तस्करों के संगठित गिरोह और दूसरे राज्यों के उद्योगों में श्रमिकों की आपूर्ति करनेवाले एजेंटों के बीच फर्क भी किया जा सकेगा लेकिन इसका क्रियान्वयन सही ढंग से हो, ग्रामीण स्तर तक जागरूकता बढ़ सके तभी इसका सकारात्मक परिणाम सामने आएगा.
-----नवल किशोर सिंह
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